वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है? इस दिन क्यों करते है माँ सरस्वती की पूजा?

why is basant panchami celebrated in hindi

दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है और इस दिन माँ सरस्वती की पूजा क्यों की जाती है। भारत में वैसे तो सभी त्यौहार बड़ी धूम – धाम से मनाए जाते है। वसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस दौरान मौसम सुहाना हो जाता है और पेड़-पौधों में नए फल-फूल आ जाते है। (why is basant panchami celebrated in hindi)

वसंत पंचमी को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन माँ सरस्वती की पूजा आराधना की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने माँ सरस्वती को यह वरदान दिया था कि, वसंत पंचमी के दिन सभी जगहों पर उनकी आराधना की जाएगी। यह पर्व ऋतू परिवर्तन के उत्सव पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। बिहार, बंगाल जैसे राज्यों में यह पर्व एक महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

वसंत पंचमी के दिन देश के हर भाग में रौनक देखी जा जाती है। इस दिन स्‍कूलों व कॉलेजों के अलावा घरों में भी विद्या की देवी माँ सरस्वती  की आराधना की जाती है। इस दिन कई लोग प्रेम के देवता काम देव की पूजा भी करते है। किसानों के लिए इस त्‍योहार का विशेष महत्‍व है। वसंत पंचमी पर सरसों के खेत लहलहा उठते है।

वसंत पंचमी का महत्‍व

ऋतुराज वसंत का बहुत बड़ा महत्‍व है क्योंकि इस दिन वसंत ऋ‍तु की शुरुआत होती है। यह ऋतु सेहत की दृष्टि से भी बहुत अच्‍छी मानी जाती है। इस ऋतु की शुरुआत होते ही पशु-पक्ष‍ियों में नई चेतना का संचार होता है। पवित्र नदियों के तट और तीर्थ स्‍थानों पर वसंत मेला भी लगता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान का भी व‍िशेष महत्‍व है। हिंदू मान्‍यता के अनुसार इस दिन देवी सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था, इसलिए हिंदु इस त्यौहार को बड़ी धूम धाम से मानते है।

बसंत पंचमी के दिन क्‍यों की जाती है माँ सरस्‍वती की पूजा?

जिस समय ब्रम्हा जी ने सृष्टि की रचना की उस समय ब्रम्हा जी ने जीव-जंतु और मनुष्य को बनाया। लेकिन ब्रम्हा जी को लगा कि, कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर सन्‍नाटा छाया हुआ था। इस सन्नाटे को ख़त्म करने के लिए ब्रम्हा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिन्हें हम माँ सरस्वती के नाम से जानते है। जन्म के समय माता सरस्वती के एक हाथ में वीणा, दुसरे हाथ में पुस्तक, तीसरा हाथ वर मुद्रा में तथा चौथे हाथ में माला थी।

ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी मिल गई। जल धारा कोलाहल करने लगी। हवा सरसराहट कर बहने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। ब्रह्मा जी ने देवी सरस्‍वती की उत्‍पत्ती वसंत पंचमी के दिन ही की थी। इसलिए हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्‍वती का जन्‍म दिन मनाया जाता है और माँ सरस्वती के इस दिन जन्म लेने के कारण ही वसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है।

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