गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

ganesh chaturthi kyu manai jati hai

गणेश चतुर्थी

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि, गणेश चतुर्थी कब है और क्यों मनाई जाती है। (ganesh chaturthi kyu manai jati hai) गणेश चतुर्थी का त्योहार हर साल बड़े जश्न के साथ मनाया जाता है। गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के छोटे पुत्र हैं।गणेश चतुर्थी का त्योहार गणेश जी के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है इस दिन सभी जगह गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है।

यह त्योहार भद्रा(मध्य अगस्त से मध्य सितंबर) में मनाया जाता है। यह त्योहार महाराष्ट्र में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है।  यह त्योहार 10 दिनों तक रहता है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है और 10 दिन के बाद गणेश जी प्रतिमा को बड़े धूम धाम के साथ विदा किया जाता है और उनकी प्रतिमा को नदी या तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है।

साल 2019 में कब है गणेश चतुर्थी

यह त्योहार शुक्ल पक्ष चतुर्थी को शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन होता है।

साल 2019 में गणेश चतुर्थी 2 सितम्बर, दिन सोमवार को है।

पूजा विधि विधान

गणेश चतुर्थी के दिन जो भी गणेश जी की पूजा करता है, उसे मनोवांछित फल प्राप्त होता है। गणेश जी की पूजा करने लिए सुबह नहा धोकर शुद्ध लाल रंग के कपड़े पहने। पूजा करते समय दिशा का महत्वपूर्ण ध्यान देना चाहिए।  गणेश जी की पूजा करते समय मुंह उत्तर दिशा या पूर्व दिशा में होना चाहिए। सबसे पहले गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं। उसके बाद गंगा जल से स्नान कराएं। गणेश जी को चौकी पर लाल कपड़े पर बिठाएं, क्योंकि गणेश जी को लाल रंग पसंद होता है।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है

एक दिन जब गणेश जी चूहे की सवारी कर रहे थे तब वें चूहे के ऊपर से फिसल कर नीचे गिर गए, यह देख चन्द्रमा को हंसी आ गई। इस बात पर गणेश जी को गुस्सा आ गया और चन्द्रमा को श्राप दे दिया कि चन्द्र अब से तुम किसी को देखने के  योग्य नहीं रह जाओगे और अगर किसी ने तुमको देख भी लिया तो वह पाप का भागी होगा। इतना कहकर गणेश जी वहां से चले गए। यह सुनकर चन्द्रमा मन ही मन दुखी और चिंतित होकर अपने अपराध का अहसास करने लगा कि मेने यह क्या कर दिया। सभी देवता भी चन्द्र के दर्शन ना पाकर दुखी हो गए थे।

इसके बाद इंद्र के नेतृत्व में सारे देवताओं ने गणेश जी की पूजा व प्रार्थना की, उसके बाद गणेश जी खुश होकर देवताओं से बोले कि मैं तुम्हारी पूजा और प्रार्थना से खुश हूँ, मांगो वर मांगो.. मैं तुम्हे क्या वर दे सकता हूँ। सभी देवताओं ने कहा, प्रभु जी चन्द्रमा को पहले जैसा कर दो, यही हमारा निवेदन है। गणेश जी ने देवताओ से कहा कि मैं अपना श्राप वापस तो नहीं ले सकता हूं। किन्तु उसमें कुछ बदलाव कर सकता हूं। गणेश जी ने कहा जो व्यक्ति जाने-अनजाने में भी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चन्द्रमा के दर्शन कर लेगा, वह अभिशप्त हो जाएगा।

अगर गणेश चतुर्थी के दिन गलती से भी चन्द्रमा के दर्शन हो जाये तो इस पाप से बचने के लिए इस मन्त्र का जाप करें  – ” सिंह प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्रोष स्यमन्तकः”

देवताओं ने गणेश जी को कहा कि,आप भी गणेश जी की शरण में जाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर शुद्ध होकर संसार को शीतलता प्रदान करें।

आप सभी को गणेश चतुर्थी की मंगलकामनाएं

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