रक्षाबंधन कब है और क्यों मनाया जाता है यह त्योहार

Why raksha bandhan is celebrated in hindi

रक्षाबंधन का त्योहार

दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि, रक्षाबंधन कब है और यह त्योहार क्यों मनाया जाता हैं। (Why raksha bandhan is celebrated in hindi) रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों को विधि अनुसार रक्षाधागा बांधती हैं। राखी का धागा बांध बहनें अपने भाइयों से, अपनी रक्षा करने का वचन लेती है।

इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ करती है। भारत के आलावा भी जहाँ पर भी  हिन्दू धर्म के लोग रहते है, वहां पर यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु को भी राखी बांधते हैं।

कई जगहों पर बहनें भाइयों को राखी बांधने से पहले तुलसी और नीम के वृक्ष को राखी बांधती हैं, जिसे वृक्ष रक्षाबंधन  कहते हैं। आइये जानते है रक्षाबंधन का त्योहार क्यों मनाया जाता हैं।

वर्ष 2019 में कब हैं रक्षाबंधन

रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं। वर्ष 2019 में रक्षाबंधन  का त्योहार 15 अगस्त, दिन वीरवार को मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन के पर्व का महत्व

रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के बीच प्यार का त्योहार है। इस दिन बहन भाई को राखी बांधती हैं, और भाई अपनी बहनों को उनकी जीवन भर रक्षा करने का वचन देते हैं। बहनें अपने भाइयों की लम्बी उम्र के लिए भगवन से प्रार्थना करती हैं।

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है Why raksha bandhan is celebrated in hindi

रक्षाबंधन के पर्व से जुड़ी कथाएं

श्री कृष्ण और द्रोपदी से जुड़ी कथा

महाभारत में, एक बार शिशुपाल ने भरी सभा में भगवान श्री कृष्ण की निंदा की, शिशुपाल ने उसी दिन सौ गलतियों की सीमा पर कर ली थी।  (भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल की माता को यह वरदान दिया था की वें उनके पुत्र की सौ ऐसी गलतियों को माफ़ कर देंगे जो मृत्यु दंड के लायक हो)   तुरंत ही भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र का शिशुपाल के ऊपर प्रयोग किया। और इसी प्रकार शिशुपाल को अपनी गलतियों की सजा भुगतनी पड़ी। भगवान श्री कृष्ण क्रोध में जब अपने सुदर्शन चक्र को छोड़ रहे थे, तब उनकी ऊँगली में भी चोट लगी और खून बहने लगा।

श्री कृष्ण के आस पास के लोग उस घाव पर कुछ बांधने के लिए इधर उधर भागने लगे। लेकिन वहां पर खड़ी द्रोपदी ने कुछ सोचे समझे बिना ही अपने साड़ी के पल्लू के कोने को फाड़कर श्री कृष्ण के घाव पर लपेट दिया। जिससे उनका खून बहना बंद हो गया। तभी से कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था और भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि जिस तरह आपने मेरे कष्ट में साथ दिया है मैं भी तुम्हारे कष्ट में अवश्य साथ दूंगा। वर्षों बाद जब पांडव द्रोपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाई थी।

इस घटना को आधार मानकर भी बहुत सी जगह रक्षाबंधनrakshabandhan का त्यौहार मनाया जाता है। और भाई अपनी बहनों को यह वचन देते है की जिस तरह श्री कृष्ण ने कष्ट के समय द्रोपदी की रक्षा की थी, ठीक उसी प्रकार मैं भी कष्ट आने पर आपका साथ अवश्य दूंगा।

राजा बलि से जुड़ी कथा

कथा इस प्रकार से है की राजा बलि ने जब एक सो दस यग्य पूर्ण कर लिए तब देवताओ को भय हो गया। उन्हें ये भय सताने लगा की यज्ञो की शक्ति से राजा बली स्वर्गलोक पर भी अपना अधिकार कर लेंगे। इसलिए सभी देव स्वर्गलोक की रक्षा हेतु भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेश धारण करकर, राजा बलि के पास भिक्षा मांगने पहुंचे।

भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया था, तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा। वरदान में बलि ने विष्णु भगवान को पाताल में उनके साथ निवास करने का आग्रह किया। भगवान विष्णु को वरदान के कारण पाताल में जाना पड़ा। इससे देवी लक्ष्मी बहुत दुखी हुई। लक्ष्मी जी भगवान विष्णु को वामन से मुक्त करवाने के लिए एक दिन वृद्ध महिला का वेष बनाकर पाताल पहुंची और वामन को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बना लिया। वामन ने जब लक्ष्मी से कुछ मांगने के लिए कहा तो लक्ष्मी ने वामन से भगवान विष्णु को पाताल से बैकुंठ भेजने के लिए कहा।

बहन की बात रखने के लिए वामन ने भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ बैकुंठ भेज दिया। भगवान विष्णु ने वामन को वरदान दिया कि चतुर्मास की अवधि में वह पाताल में आकर रहेंगे। इसके बाद से हर साल चार महीने भगवान विष्णु पाताल में रहते हैं।

रक्षाबंधन मानाने की विधि

  • रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।
  • रक्षा बंधन के दिन सुबह भाई-बहन स्नान करके, दोनों एक साथ बैठकर भगवान की पूजा करते हैं।
  • इसके बाद बहनें रोली, कुंमकुंम एवं दीप जलकर थाल सजाते हैं। इस थाल में रंग-बिरंगी राखियों को रखकर उसकी पूजा करते हैं।
  • फिर बहनें भाइयों के माथे पर कुंमकुंम एवं रोली से तिलक करती हैं।
  • इसके बाद भाई की दाईं कलाई पर रेशम की डोरी से बनी राखी बांधती हैं और मिठाई से भाई का मुंह मीठा कराती हैं।
  • राखी बंधवाने के बाद भाई बहन को रक्षा का आशीर्वाद एवं उपहार व धन देता है।

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