होली कब है और क्यों मनाते है होली?

why we celebrate holi in hindi

दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि, होली कब है और क्यों मनाते है होली। ( why we celebrate holi in hindi ) भारत देश एक त्यौहारों का देश है। यहाँ सभी त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाए जाते है। होली का त्यौहार भारत के साथ-साथ नेपाल में भी मनाया जाता है। सभी त्यौहारों में होली एक लोकप्रिय त्यौहार है, जिसे ‘रंगों का त्योहार’ भी कहा जाता है। इस दिन सभी लोग रंगों के साथ खेलते है। होली का त्यौहार एक उत्साह भरा त्यौहार है। इसे हर धर्म के लोग बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं।

इस दिन सभी दुःख दर्द और लड़ाई झगड़े भुला कर एक दुसरे को रंग लगाया जाता है और गले लगाया जाता है। होली त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है, इस दिन लोग पुरानी दुश्मनी और ग़म भुला कर नए रिश्ते बनाते है। अपनों के साथ दिल की ख़ुशी बांटते है। रंगों के इस त्यौहार में भांग की ठंडाई और नाच गीत का मज़ा भी लिया जाता है।

होली कब है 2019 ?

वर्ष 2019 में 20 मार्च को होलिका का दहन किया जाएगा और 21 मार्च को रंगों से होली (रंग होली) खेली जाएगी। वैसे तो होली हर बार फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। और हर साल होली लगभग मार्च के महीने में ही होती है।

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होली का महत्व

होली का त्यौहार रंगों और प्रेम का त्यौहार है। इस त्यौहार को लगभग पुरे भारत में लोग बहुत ही धूम धाम से मनाते हैं। यह त्यौहार लोगों में जोश और उमंग भर देता है। इससे लोगों के बीच की दूरियां ख़त्म होती हैं और उनके बीच प्यार बढ़ता है। इस दिन लोग लाल गुलाल को प्यार और लगाव का प्रतीक मानते है, इसलिए सबसे पहले लाल रंग के गुलाल को एक दुसरे पर लगाते है।

होली के दिन लोग पुरानी दुश्मनी और ग़म भुला कर नए रिश्ते बनाते है। अपनों के साथ दिल की ख़ुशी बांटते है। यह त्यौहार दुश्मनों को भी दोस्त बना देता है। होली का महत्व यह भी है कि, यह रिश्तों में सुधार लाता है।

इस दिन लोग एक दुसरे के घरों में जाते हैं और रंगों के साथ खेलते हैं। कुछ दोस्त दूर होने के कारण इस बहाने फिर से मिल जाते हैं। ये त्यौहार हर उम्र के लोगों में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। होली के दिन हर कोई गुलाल के साथ खेलते हैं। ये त्यौहार जातिवाद, रंग, पंथ जैसे सामाजिक बुराई को मिटा कर भस्म कर देता है। होली का त्यौहार लोगो में सकारात्मक सोच लाता है।

होली की कथा

बहुत समय पहले, एक राजा हिरण्य कश्यप और उसकी बहन होलिका थे। “हिरण्य कश्यप” चाहता था कि, लोग उसे भगवान समझे और उसकी पूजा करें। कुछ दिनों बाद “हिरण्य कश्यप” के घर एक बालक ने जन्म लिया जिसका नाम प्रहलाद रखा गया। जो बचपन से ही भगवान विष्णु जी की भक्ति करता था। प्रहलाद के विष्णु जी को भगवान माननें को लेकर “हिरण्य कश्यप” बड़ा ही चिंतित हो उठा। उसने कई बार अपने पुत्र को बोला की विष्णु भगवान नही है, बल्कि असली भगवान तुम्हारा अपना पिता है। मगर प्रहलाद नें अपने पिता की एक ना सुनी और वो बचपन से ही श्रीहरी का जाप करता रहता था।

लाख बार समझाने पर जब प्रहलाद ने अपनी जिद नहीं छोड़ी तो “हिरण्य कश्यप” ने प्रहलाद को मारने के कई प्रयत्न किए, मगर सभी असफल रहे।  एक दिन “हिरण्य कश्यप” ने उसको आग से जलाकर मारने की योजना बनाई। और अपनी बहन होलिका को याद किया और “हिरण्य कश्यप” के कहने पर होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोद में लिया और अग्नी में बैठ गई।

होलिका को भगवान से ये वरदान मिला था कि, आग उसका कुछ भी नहीं कर सकती और होलिका को भगवान शिव जी की तरफ से एक चुनरी भेटं दी थी। जिसकी वजह से होलिका को अग्नि कुछ भी नहीं कर सकती थी। मगर भगवान की मंजूरी पर वही चूनरी प्रहलाद पर जा पड़ी और होलिका ही इस आग में जलकर खाक हो गई। इसी कथा से होली उत्सव का जन्म हुआ। होली के दिन अच्छाई की जीत और बुराई की हार हुई थी।

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