गीता जयंती कब है और क्या है इसे मानाने का महत्त्व

importance of geeta jayanti

गीता जयंती कब है?

दोस्तों इस आर्टिकल हम आपको बताएंगे की गीता जयंती कब है और इसे मानाने का क्या महत्त्व है। (importance of geeta jayanti in hindi) भगवान श्री कृष्ण ने जिस दिन अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, उसे गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार गीता जयंती 8 दिसम्बर, 2019 को मनाई जाएगी। मान्‍यता है कि, श्रीमद्भगवद् गीता का जन्‍म श्री कृष्‍ण के मुख से कुरुक्षेत्र के मैदान में हुआ था।

श्रीमद्भगवद् गीता का महत्‍व

श्रीमद्भगवद् गीता हिंदुओं का पवित्र ग्रंथ होने के साथ साथ, व‍िश्‍व का इकलौता ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। गीता मनुष्‍य का परिचय जीवन की वास्‍तविकता से करवाती है और बिना स्‍वार्थ काम करने के लए प्रेरित करती है। गीता अज्ञान, दुख, मोह, क्रोध,काम और लोभ जैसी चीजों से मुक्ति का मार्ग बताती है।

क्या है गीता जयंती मानाने की कथा

गीता महाभारत के अध्याय का ही हिस्सा है। कहा ऐसे जाता है कि, जब कुरुक्षेत्र के मैदान में भाई ही भाई के सामने शस्त्र लिए खड़ा था यानि के   कौरव और पांडव एक दूसरे के आमने सामने युद्ध के लिए तैयार खड़े थे। अर्जुन के सामने गुरु द्रोण, भीष्म पितामह आदि खड़े थे। उस समय जब अर्जुन ने अपने ही गुरुओं को दुश्मन के रूप में देखा, तो उसका धनुष हाथ से छूटने लगा और पैर काँपने लगे और अपने आप को असमर्थ पाया। अर्जुन ने अपने मन में सोचा कि, ये मेरे ही भाई-बंधु हैं इन्हें मारकर हासिल किये मुकुट को मैं कैसे धारण कर सकूंगा।

अर्जुन ने उस समय कुरुक्षेत्र की रणभूमि में हथियार त्याग दिए थे।  ऐसे में उनके सारथी बने भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया और तभी से गीता का जन्म हुआ। गीता के उपदेश में श्री कृष्ण ने अर्जुन को धर्म के बारे में बताया और उसे निभाने की ताकत दी। इसमें उन्हें आत्मा-परमात्मा से लेकर धर्म-कर्म से जुड़ी अर्जुन की हर शंका का निदान किया। गीता के उपदेश के दौरान ही भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को अपना विराट रूप दिखाकर जीवन की वास्तविकता से उनका सामना करवाते है। गीता का जन्म मनुष्य को धर्म का सही अर्थ समझाने के लिए किया गया।

कैसे मनाई जाती है गीता जयंती

  • गीता जयंती के द‍िन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया जाता है।
  • गीता के उपदेश पढ़े और सुने जाते है।
  • इस दिन बहुत से लोग उपावस भी रखते है।
  • इस दिन देश भर के मंदिरों विशेषकर इस्‍कॉन मंदिर में भगवान कृष्‍ण और गीता की पूजा की जाती है।

गीता जयंती का महत्व

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता आत्मा एवं परमात्मा के स्वरूप को बताती है।  गीता के विचारों से मनुष्य को उचित बोध कि प्राप्ति होती है। यह आत्मा तत्व का निर्धारण करता है, उसकी प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

आज के समय में इस ज्ञान की प्राप्ति से अनेक विकारों से मुक्त हुआ जा सकता है। गीता केवल लाल कपड़े में बाँधकर घर में रखने के लिए नहीं बल्कि उसे पढ़कर संदेशों को आत्मसात करने के लिए है। गीता का चिंतन अज्ञानता के आचरण को हटाकर आत्मज्ञान की ओर प्रवृत्त करता है।

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