दिवाली कब है और क्यों मनाई जाती है दिवाली

diwali kyo manai jati hai in hindi

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि, दिवाली कब है और क्यों मनाया जाता है यह त्योहार। (diwali kyo manai jati hai in hindi)  भारत देश त्योहारों का देश है, त्योहारों की भूमि है। यहाँ सभी त्योहारों को बहुत महानता दी जाती है और सभी त्योहार बड़ी धूम धाम से मनाए जाते है।

सभी त्योहारों में से दिवाली एक ऐसा त्योहार है, जिसका इंतजार बच्चे, बूढ़े और नौजवान बेसब्री से करते है। दीपावली का पर्व दशहरे के 20 दिन बाद आता है। कुछ भारतीय त्योहार ऐसे जो  भारत में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी मनाए जाते है, दिवाली भी उन त्योहारों में से एक है जो की विदेश में भी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। आखिर हम दिवाली मानते ही क्यों है और क्या है इसे मानाने का कारण?

कुछ लोग यह मानते है कि, दिवाली के दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापिस लौटे थे। इसी वजह से दिवाली मनाई जाती है। बल्कि ऐसा नहीं है, दिवाली पर्व मनाने के पीछे और भी बहुत से कारण है और कथाएं प्रचलित है।

साल 2018 में कब है दिवाली diwali kyo manai jati hai in hindi

दिवाली त्योहार कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दिवाली दीपों का त्योहार है और इस दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस साल दिवाली 7 नवंबर, 2018 को मनाई जाएगी। दिवाली से अगले दिन गोवर्धन की पूजा की जाती है और गोवर्धन से अगले ही भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है।

आइये जानते है की दिवाली क्यों मनाई जाती है।

 श्री राम के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में दिवाली मनाई जाती है

यह तो आप सभी को पता ही है कि, इस दिन दशरथ पुत्र श्री राम 14 वर्ष का वनवास काटकर और अपने वनवास काल में रावण का वध करके सीता माता को मुक्त करवाकर अयोध्या वापिस लौटे थे। इसी ख़ुशी में दिवाली पर्व मनाया जाता है। कैकई, श्रीराम को उनके पिता दशरथ से वनवास भेजने के लिए वचनवद्ध कर देती हैं। श्री राम अपने पिता के आदेश को मानते हुए, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वनवास के लिए चले जाते है। जब भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापिस लौटते है, तो उनके वापिस आने की ख़ुशी में दिवाली मनाई जाती है। रामायण के अनुसार दिवाली इसी वजह से मनाई जाती है।

समुन्द्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी जी ने सृष्टि में अवतार लिया था

दिवाली मनाने का मुख्य कारण यह भी है कि, इसी दिन समुन्द्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी जी ने सृष्टि में अवतार लिया था। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसी कारण से, दिवाली के दिन हर घर में दीपो को जलाने केसाथ-साथ धन की देवी माता लक्ष्मी जी की पूजा भी की जाती है।

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इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था

दिवाली मनाने का एक और यह भी कारण मानते है कि, इसी दिन भगवान श्री कृष्ण जी ने नरकासुर राक्षस का वध करके देवी देवताओ पर हो रहे अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी। नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंधित कर के रखा था। श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध करके इन कन्याओं को मुक्त करवाया था। इसलिए इस दिन को नरक चतुर्थी भी कहा जाता है और इसे विजय पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

कार्तिक अमावस्या के दिन पांडव वनवास काटकर अपने राज्य लौटे थे

महाभारत के अनुसार,  कौरवों ने शतरंज के खेल में पांडवों का सब कुछ छीन लिया था। जब उनका सब कुछ छीन लिया गया, तब उन्हें राज्य छोड़ कर 13 वर्ष के लिए वनवास जाना पड़ा। कार्तिक अमावस्या के दिन ही पांडव 13 वर्ष का वनवास काटकर अपने राज्य वापिस लौटे थे। उनके राज्य वापिस लौटने की खुशी में, उनके राज्य के लोगों नें दीप जला कर खुशियां मनाई थी।

इसी दिन सिक्खों के 6वें गुरु गुरु गोविंद सिंह को आजादी मिली थी

इस त्योहार को सिख धर्म के लोग भी बड़ी धूम धाम से मनाते है क्योंकि इसी दिन सिक्खों के 6वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह को आजादी मिली थी। मुगल बादशाह जहांगीर ने सिखों के 6वें गुरु गोविंद सिंह सहित 52 राजाओं को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया हुआ था। जब गुरु को कैद से आजाद किया जाने लगा तो वे अपने साथ कैद हुए राजाओं को भी रिहा करने की मांग करने लगे। गुरू हरगोविंद सिंह के कहने पर राजाओं को भी कैद से रिहाई मिली गई थी।

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