क्या है महाशिवरात्रि का महत्व?

maha shivratri ka mahatva

दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम आपको महाशिवरात्रि का महत्व बताएंगे। (maha shivratri ka mahatva) इस दिन भगवान शिव शिव शंकर की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन शिव भक्त पूरा दिन उपवास रखेंगे और भांग का प्रसाद ग्रहण करेंगे। महाशिवरात्रि के दिन ही प्रयागराज में चल रहे कुंभ में भी आखिरी शाही स्नान होगा और इसी के साथ कुंभ मेले का समापन हो जाएगा।

महाशिवरात्रि के दिन, देश के हर हिस्सों में शिवलिंग पर दूध, दही, बेलपत्र, धतूरा, शर्करा आदि से शिव जी का पूजन किया जाता है। महाशिवरात्रि को पूरे देश में एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन महादेव का विवाह हुआ था।  इस त्योहार में शिव भक्त पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना में भजन गाते हैं। जो शिव भक्त उपवास रखते है, वें शिव लिंग को पानी और बेलपत्र चढ़ाने के बाद ही अपना उपवास तोड़ते हैं।

महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस दिन अविवाहित महिलाएं उपवास रखकर भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं कि, उन्हें उनके (भगवान शिव) जैसा ही पति मिले। जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र और परिवार के लिए मंगल कामना करती हैं।

महाशिवरात्रि कब मनाई जाएगी

महाशिवरात्रि प्रति वर्ष फाल्गुन में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाई जाती है। इस बार महाशिवरात्रि 4 मार्च 2019 को पूरे भारत में मनाई जाएगी। इस बार की शिवरात्रि और भी खास हो जाएगी क्योंकि इस बार शिवरात्रि सोमवार को है।

महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखने का महत्व

महाशिवरात्रि का व्रत, संसार में रहते हुए मुष्य का कल्याण करने वाला व्रत माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को रखने से सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है और सभी दुखों का अंत होता है। जगत के कल्याण के लिए भगवान आशुतोष की आराधना अवश्य करनी चाहिए। भगवान शिव की साधना से सुख-सौभाग्य, धन-धान्य और समृद्धि की कमी कभी नहीं होती। इसलिए सभी को महाशिवरात्रि का व्रत अवश्य करना चाहिए।

महाशिवरात्रि का महत्व

महाशिवरात्रि का दिन शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है। इस दिन सभी शिव भक्त शिव शंकर भगवान के लिए व्रत रखते है और खास पूजा-अर्चना करते हैं। जैसा की हमने आपको पहले भी बताया कि, महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि का व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण  माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने से अविवाहित महिलाओं की शादी जल्दी होती है और उन्हें अच्छा और गुणवान पति मिलता है। जबकि, विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति के सुखी जीवन और लम्बी आयु के लिए व्रत रखती हैं। ऐसा भी माना जाता है कि, महाशिवरात्रि के दिन मध्यरात्रि के समय ईश्वर मनुष्य के सबसे ज्यादा निकट होते हैं। इसी वजह से लोग शिवरात्रि के दिन रातभर जागते है और भगवान शिव की आराधना करते है।

महाशिवरात्रि की कथा

कालकूल कथा

कथा इस प्रकार से है कि, अमृत प्राप्त करने के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ। लेकिन इस अमृत से पहले कालकूट नाम का विष भी सागर से निकला। ये विष इतना खतरनाक था कि, इससे पूरा ब्रह्मांड नष्ट किया जा सकता था। लेकिन इसे सिर्फ भगवान शिव ही नष्ट कर सकते थे। उस समय भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था। इससे उनका कंठ नीला हो गया। इस घटना के बाद से भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ा। यह भी माना जाता है कि, भगवान शिव द्वारा विष पीकर पूरे संसार को इससे बचाने की इस घटना के उपलक्ष में ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है।

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